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आम का सीजन आने वाला है और आमों के राजा अल्फांसो की नीलामी शुरू हो गई है। पुणे के व्यापारियों ने एपीएमसी में आमों की पहली नीलामी में भाग लिया। यहां एक व्यापारी ने अल्फांसो आम की टोकरी 31 हजार रुपए में खरीदा है।
व्यापारी ने दावा किया है कि यह 50 सालों में सबसे महंगी खरीद है। यूट्यूब पर इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग आम के टोकरे पर फूलों की माला चढ़ाकर बंपर व्यापार के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

प्रार्थना करते व्यापारी
व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण होता है बोली लगाना
आमों के व्यापारियों को लिए बोली लगाना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आम के सीजन में व्यापार का रास्ता तय होता है। इस समय आम का मौसम आधिकारिक तौर पर शुरू होता है। टोकरा खरीदने वाले व्यापारी ने बताया कि जब पहली खेप बाजार में आती है, तो उन्हें इसी तरह से नीलाम किया जाता है। व्यापारी उन्हें सबसे पहले खरीदने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने बताया कि आमों की शुरुआती खेप उतारना हमेशा अच्छा होता है, क्योंकि इससे व्यापारियों को थोक बाजार में बढ़त हासिल करने में मदद मिलती है। इस साल अल्फांसो की नीलामी 5,000 से शुरू हुई और 31,000 प्रति टोकरा तक गई।
अल्फांसो आम की ये है खासियत
अल्फांसो को “आमों का राजा” भी कहा जाता है। यह सभी फलों में सबसे अच्छा, स्वादिष्ट, मीठा, सुगंधित होता है। अल्फांसो बाकी आमों से बिल्कुल अलग होता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में इसकी फसल होती है, लेकिन सबसे बड़ा उत्पादक महाराष्ट्र ही है। यहां से हर साल करीब 13,000 मीट्रिक टन अल्फांसो आम का एक्सपोर्ट किया जाता है। इसे अंग्रेजी में अल्फांसो, मराठी में हापुस, गुजराती में हाफुस और कन्नड़ में आपूस के नाम से जाना जाता है। एक अल्फांसो आम का वजन करीब 250 ग्राम से 300 ग्राम तक होता है। इसकी खासियत है कि ये पकने के एक हफ्ते बाद तक खराब नहीं होता।
नेचूरल आम नहीं है अल्फांसो
इसे सबसे पहले पुर्तगालियों ने बनाया था। एक सामान्य आम को और अधिक बड़ा करने के लिए उन्होंने ग्राफ्टिंग का इस्तेमाल किया। इस आम का नाम ‘अल्फांसो’ अफोंसो डी अल्बुकर्क (Afonso de Albuquerque) के सम्मान में रखा गया है। अल्बूकर्क एक नोबलमैन और मिलिट्री एक्सपर्ट थे, जिन्होंने भारत में पुर्तगाली कॉलोनी बसाने में मदद की थी।
आम का सीजन आने वाला है और आमों के राजा अल्फांसो की नीलामी शुरू हो गई है। पुणे के व्यापारियों ने एपीएमसी में आमों की पहली नीलामी में भाग लिया। यहां एक व्यापारी ने अल्फांसो आम की टोकरी 31 हजार रुपए में खरीदा है।व्यापारी ने दावा किया है कि यह 50 सालों में सबसे महंगी खरीद है। यूट्यूब पर इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग आम के टोकरे पर फूलों की माला चढ़ाकर बंपर व्यापार के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।प्रार्थना करते व्यापारीव्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण होता है बोली लगानाआमों के व्यापारियों को लिए बोली लगाना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आम के सीजन में व्यापार का रास्ता तय होता है। इस समय आम का मौसम आधिकारिक तौर पर शुरू होता है। टोकरा खरीदने वाले व्यापारी ने बताया कि जब पहली खेप बाजार में आती है, तो उन्हें इसी तरह से नीलाम किया जाता है। व्यापारी उन्हें सबसे पहले खरीदने की कोशिश करते हैं।उन्होंने बताया कि आमों की शुरुआती खेप उतारना हमेशा अच्छा होता है, क्योंकि इससे व्यापारियों को थोक बाजार में बढ़त हासिल करने में मदद मिलती है। इस साल अल्फांसो की नीलामी 5,000 से शुरू हुई और 31,000 प्रति टोकरा तक गई।अल्फांसो आम की ये है खासियतअल्फांसो को “आमों का राजा” भी कहा जाता है। यह सभी फलों में सबसे अच्छा, स्वादिष्ट, मीठा, सुगंधित होता है। अल्फांसो बाकी आमों से बिल्कुल अलग होता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में इसकी फसल होती है, लेकिन सबसे बड़ा उत्पादक महाराष्ट्र ही है। यहां से हर साल करीब 13,000 मीट्रिक टन अल्फांसो आम का एक्सपोर्ट किया जाता है। इसे अंग्रेजी में अल्फांसो, मराठी में हापुस, गुजराती में हाफुस और कन्नड़ में आपूस के नाम से जाना जाता है। एक अल्फांसो आम का वजन करीब 250 ग्राम से 300 ग्राम तक होता है। इसकी खासियत है कि ये पकने के एक हफ्ते बाद तक खराब नहीं होता।नेचूरल आम नहीं है अल्फांसोइसे सबसे पहले पुर्तगालियों ने बनाया था। एक सामान्य आम को और अधिक बड़ा करने के लिए उन्होंने ग्राफ्टिंग का इस्तेमाल किया। इस आम का नाम ‘अल्फांसो’ अफोंसो डी अल्बुकर्क (Afonso de Albuquerque) के सम्मान में रखा गया है। अल्बूकर्क एक नोबलमैन और मिलिट्री एक्सपर्ट थे, जिन्होंने भारत में पुर्तगाली कॉलोनी बसाने में मदद की थी।