
करजई ने कहा कि उन्होंने तालिबान को काबुल में आने का न्यौता लोगों की रक्षा की खातिर दिया था। उन्हें डर था कि अफगानिस्तान और काबुल दोनों अराजकता में फंस सकते हैं और जो अवांछित तत्व आजतक देश को लूटते रहे वे कहीं दुकानों को न लूटने लगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति गनी के साथ उनके सुरक्षा अधिकारी भी देश छोड़कर चले गये।
History of Taliban: तालिबान का वो इतिहास जिसे याद कर सिहर उठते हैं लोग
हाइलाइट्स
- काबुल पर तालिबान के कब्जे को लेकर हामिद करजई का बड़ा खुलासा
- करजई ने कहा कि तालिबान मेरे न्योते पर काबुल में घुसा
- पूर्व अफगान राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने लोगों के लिए तालिबान को बुलाया
तालिबान ने अफगान राजधानी पर कब्जा नहीं किया बल्कि उसे निमंत्रित किया गया था। यह दावा तालिबान को निमंत्रण देने वाले शख्स ने किया है। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के साथ इंटरव्यू में पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने बताया कि अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी की अफगानिस्तान से भागने के बाद उन्हें तालिबान को शहर में आने के लिए कहना पड़ा था।
करजई ने कहा कि उन्होंने तालिबान को काबुल में आने का न्यौता लोगों की रक्षा की खातिर दिया था। उन्हें डर था कि अफगानिस्तान और काबुल दोनों अराजकता में फंस सकते हैं और जो अवांछित तत्व आजतक देश को लूटते रहे वे कहीं दुकानों को न लूटने लगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति गनी के साथ उनके सुरक्षा अधिकारी भी देश छोड़कर चले गये।
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करजई बोले- मैंने देश छोड़ने के ऑफर को ठुकराया
जिसके बाद हामिद करजई ने अफगानिस्तान के तत्कालीन रक्षा मंत्री बिस्मिल्ला खान से संपर्क किया। उन्होंने पूछा कि क्या अफगान सरकार का कोई अवशेष अब भी बचा हुआ है। तब बिस्मिल्ला खान ने उनसे सवाल किया कि क्या वह भी काबुल छोड़ना चाहते हैं, लेकिन तेरह वर्षों तक देश के राष्ट्रपति रहे करजई ने काबुल छोड़ने से इनकार कर दिया। करजई को पता चला कि कोई नहीं बचा, यहां तक कि काबुल के पुलिस प्रमुख भी नहीं रूके।
राजधानी में कोई अधिकारी नहीं था, पुलिस प्रमुख, कोर कमांडर, अन्य इकाइयां कोई शहर में नहीं था। सभी शहर से चुके थे।
हामिद करजई
काबुल के मध्य में अपने परिसर में करजई इंटरव्यू के दौरान इस बात पर कायम थे कि उनकी, सरकार के मुख्य वार्ताकार अब्दुल्ला अब्दुल्ला और दोहा में तालिबान नेतृत्व की आखिरी घड़ी तक कोशिश थी कि किसी समझौते के तहत तालिबान राजधानी में कदम रखे, लेकिन गनी की रवानगी ने आखिरी वक्त पर इसपर पानी फेर दिया। इस संभावित सौदे की उल्टी गिनती तालिबान के सत्ता पर काबिज होने से एक दिन पहले 14 अगस्त को शुरू हुई।
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करजई का दावा- तालिबान शहर में घुसना नहीं चाहता था
करजई और अब्दुल्ला ने गनी के साथ बैठक की तथा उनके बीच इस बात पर सहमति बनी कि सत्ता साझेदारी समझौते पर बातचीत के लिए 15 अन्य की सूची के साथ अगले दिन वे दोहा रवाना होंगे। करजई ने बताया कि तालिबान तब तक काबुल के बाहरी हिस्से में पहुंच चुके थे लेकिन कतर में उसके नेतृत्व ने वादा किया कि जबतक समझौता हो नहीं जाता तबतक वे बाहर ही रहेंगे।
हामिद करजई और अब्दुल्ला अब्दुला काबुल में नजरबंद? तालिबान ने किया इनकार
करजई ने कहा कि 15 अगस्त तड़के उन्होंने सूची तैयार करने का इंतजार किया। लेकिन शहर में बेचैनी थी और नाजुक घड़ी थी। तालिबान के काबिज हो जाने की अफवाहें फैलने लगीं । करजई ने दोहा से संपर्क किया, उन्हें बताया गया कि तालिबान शहर में दाखिल नहीं होंगे। करजई के अनुसार, सुबह तालिबान नेता यह कहने लगे कि सरकार अपनी जगह बनी रहे और वह नहीं जाए एवं उनका शहर में दाखिल होने का इरादा नहीं है।
अफगानों ने सभी तरफ से जिंदगियां खोयी हैं। अफगान सेना ने नुकसान उठाया, अफगान पुलिस ने नुकसान उठाया, तालिबान सैनिकों ने भी नुकसान उठाया।
हामिद करजई
अशरफ गनी के देश छोड़ते ही बिगड़ने लगा माहौल
उन्होंने कहा कि मैंने एवं अन्य ने विभिन्न अधिकारियों से बात की तथा हमें आश्वासन दिया गया कि हां, यही बात है और यह कि अमेरिकी एवं सरकारी (सैन्य) बल अपनी जगह पर डटे हैं तथा काबुल फतह नहीं होगा। लेकिन दोपहर पौने तीन बजे यह करीब करीब स्पष्ट हो गया कि गनी शहर से जा चुके हैं। करजई ने रक्षा मंत्री, गृहमंत्री से संपर्क किया, उन्होंने काबुल के पुलिस प्रमुख के बारे में पता किया। पता चला कि सारे जा चुके हैं।
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गनी ने करजई को राष्ट्रपति पद संभालने का दिया था ऑफर
करजई ने कहा कि राजधानी में कोई अधिकारी नहीं था, पुलिस प्रमुख, कोर कमांडर, अन्य इकाइयां कोई शहर में नहीं था। सभी शहर से चुके थे। गनी की अपनी सुरक्षा इकाई के उपप्रमुख ने करजई से संपर्क कर उन्हें महल में आने एवं राष्ट्रपति का पद संभालने को कहा। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया एवं कहा कि कानूनी रूप से उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है। उसके विपरीत पूर्व राष्ट्रपति ने चीजें सार्वजनिक करने का फैसला किया एवं टेलीविजन पर संदेश प्रसारित किया, ताकि अफगान लोग जान पायें कि हम सभी यहां हैं। इस दौरान उनके बच्चे भी उनके साथ थे।
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करजई इस बात पर कायम हैं कि यदि गनी काबुल में बने रहते तो शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन का समझौता होता। वह यहां अपनी पत्नी एवं बच्चों के साथ रहते हैं।उन्होंने कहा कि बिल्कुल। बिल्कुल। इसी बात की हम तैयारी कर रहे थे, हम उस शाम या अगली सुबह शांति परिषद के अध्यक्ष के साथ दोहा जाने एवं समझौते को अंतिम रूप देने की की उम्मीद कर रहे थे।
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हम 40 साल से युद्ध में उलझे, दुनिया सहायता करे
उन्हेांने कहा कि मुझे विश्वास है कि तालिबान नेता उसी, उसी उद्देश्य के लिए दोहा में हमारा इंतजार कर रहे थे। आज करजई नियमित रूपसे तालिबान नेतृत्व से मिलते हैं और कहते हैं कि दुनिया उसके साथ सहयोग करे। उन्होंने कहा कि यह बात भी उतना ही अहम है कि अफगानों को साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि 40 साल से अधिक समय से अफगानिनस्तान पर युद्ध छाया रहा और पिछले 20 साल में अफगानों ने हर तरफ से नुकसान उठाया।
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हामिद करजई
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Web Title : hamid karzai invited taliban to stop chaos in kabul, claims former afghan president interview
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करजई ने कहा कि उन्होंने तालिबान को काबुल में आने का न्यौता लोगों की रक्षा की खातिर दिया था। उन्हें डर था कि अफगानिस्तान और काबुल दोनों अराजकता में फंस सकते हैं और जो अवांछित तत्व आजतक देश को लूटते रहे वे कहीं दुकानों को न लूटने लगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति गनी के साथ उनके सुरक्षा अधिकारी भी देश छोड़कर चले गये। History of Taliban: तालिबान का वो इतिहास जिसे याद कर सिहर उठते हैं लोगहाइलाइट्सकाबुल पर तालिबान के कब्जे को लेकर हामिद करजई का बड़ा खुलासाकरजई ने कहा कि तालिबान मेरे न्योते पर काबुल में घुसापूर्व अफगान राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने लोगों के लिए तालिबान को बुलायाकाबुलतालिबान ने अफगान राजधानी पर कब्जा नहीं किया बल्कि उसे निमंत्रित किया गया था। यह दावा तालिबान को निमंत्रण देने वाले शख्स ने किया है। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के साथ इंटरव्यू में पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने बताया कि अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी की अफगानिस्तान से भागने के बाद उन्हें तालिबान को शहर में आने के लिए कहना पड़ा था।करजई ने कहा कि उन्होंने तालिबान को काबुल में आने का न्यौता लोगों की रक्षा की खातिर दिया था। उन्हें डर था कि अफगानिस्तान और काबुल दोनों अराजकता में फंस सकते हैं और जो अवांछित तत्व आजतक देश को लूटते रहे वे कहीं दुकानों को न लूटने लगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति गनी के साथ उनके सुरक्षा अधिकारी भी देश छोड़कर चले गये।Taliban News: अमेरिका से दया और करुणा की ‘भीख’ क्यों मांग रहा तालिबान, क्या शुरू हो गए वो बुरे दिन?करजई बोले- मैंने देश छोड़ने के ऑफर को ठुकरायाजिसके बाद हामिद करजई ने अफगानिस्तान के तत्कालीन रक्षा मंत्री बिस्मिल्ला खान से संपर्क किया। उन्होंने पूछा कि क्या अफगान सरकार का कोई अवशेष अब भी बचा हुआ है। तब बिस्मिल्ला खान ने उनसे सवाल किया कि क्या वह भी काबुल छोड़ना चाहते हैं, लेकिन तेरह वर्षों तक देश के राष्ट्रपति रहे करजई ने काबुल छोड़ने से इनकार कर दिया। करजई को पता चला कि कोई नहीं बचा, यहां तक कि काबुल के पुलिस प्रमुख भी नहीं रूके।राजधानी में कोई अधिकारी नहीं था, पुलिस प्रमुख, कोर कमांडर, अन्य इकाइयां कोई शहर में नहीं था। सभी शहर से चुके थे।हामिद करजईकाबुल के मध्य में अपने परिसर में करजई इंटरव्यू के दौरान इस बात पर कायम थे कि उनकी, सरकार के मुख्य वार्ताकार अब्दुल्ला अब्दुल्ला और दोहा में तालिबान नेतृत्व की आखिरी घड़ी तक कोशिश थी कि किसी समझौते के तहत तालिबान राजधानी में कदम रखे, लेकिन गनी की रवानगी ने आखिरी वक्त पर इसपर पानी फेर दिया। इस संभावित सौदे की उल्टी गिनती तालिबान के सत्ता पर काबिज होने से एक दिन पहले 14 अगस्त को शुरू हुई। अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी तालिबान से क्यों तोड़ा नाता? इमरान सरकार के लिए कह दी बड़ी बातकरजई का दावा- तालिबान शहर में घुसना नहीं चाहता थाकरजई और अब्दुल्ला ने गनी के साथ बैठक की तथा उनके बीच इस बात पर सहमति बनी कि सत्ता साझेदारी समझौते पर बातचीत के लिए 15 अन्य की सूची के साथ अगले दिन वे दोहा रवाना होंगे। करजई ने बताया कि तालिबान तब तक काबुल के बाहरी हिस्से में पहुंच चुके थे लेकिन कतर में उसके नेतृत्व ने वादा किया कि जबतक समझौता हो नहीं जाता तबतक वे बाहर ही रहेंगे।हामिद करजई और अब्दुल्ला अब्दुला काबुल में नजरबंद? तालिबान ने किया इनकारकरजई ने कहा कि 15 अगस्त तड़के उन्होंने सूची तैयार करने का इंतजार किया। लेकिन शहर में बेचैनी थी और नाजुक घड़ी थी। तालिबान के काबिज हो जाने की अफवाहें फैलने लगीं । करजई ने दोहा से संपर्क किया, उन्हें बताया गया कि तालिबान शहर में दाखिल नहीं होंगे। करजई के अनुसार, सुबह तालिबान नेता यह कहने लगे कि सरकार अपनी जगह बनी रहे और वह नहीं जाए एवं उनका शहर में दाखिल होने का इरादा नहीं है।अफगानों ने सभी तरफ से जिंदगियां खोयी हैं। अफगान सेना ने नुकसान उठाया, अफगान पुलिस ने नुकसान उठाया, तालिबान सैनिकों ने भी नुकसान उठाया।हामिद करजईअशरफ गनी के देश छोड़ते ही बिगड़ने लगा माहौलउन्होंने कहा कि मैंने एवं अन्य ने विभिन्न अधिकारियों से बात की तथा हमें आश्वासन दिया गया कि हां, यही बात है और यह कि अमेरिकी एवं सरकारी (सैन्य) बल अपनी जगह पर डटे हैं तथा काबुल फतह नहीं होगा। लेकिन दोपहर पौने तीन बजे यह करीब करीब स्पष्ट हो गया कि गनी शहर से जा चुके हैं। करजई ने रक्षा मंत्री, गृहमंत्री से संपर्क किया, उन्होंने काबुल के पुलिस प्रमुख के बारे में पता किया। पता चला कि सारे जा चुके हैं।अफगानिस्तान में आया तालिबान राज, किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज, समझें समीकरणगनी ने करजई को राष्ट्रपति पद संभालने का दिया था ऑफरकरजई ने कहा कि राजधानी में कोई अधिकारी नहीं था, पुलिस प्रमुख, कोर कमांडर, अन्य इकाइयां कोई शहर में नहीं था। सभी शहर से चुके थे। गनी की अपनी सुरक्षा इकाई के उपप्रमुख ने करजई से संपर्क कर उन्हें महल में आने एवं राष्ट्रपति का पद संभालने को कहा। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया एवं कहा कि कानूनी रूप से उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है। उसके विपरीत पूर्व राष्ट्रपति ने चीजें सार्वजनिक करने का फैसला किया एवं टेलीविजन पर संदेश प्रसारित किया, ताकि अफगान लोग जान पायें कि हम सभी यहां हैं। इस दौरान उनके बच्चे भी उनके साथ थे।Taliban News: तालिबान के लिए देश के हीरो ‘आत्मघाती हमलावर’, सिराजुद्दीन हक्कानी का ऐलान- फ्री में देंगे जमीनकरजई इस बात पर कायम हैं कि यदि गनी काबुल में बने रहते तो शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन का समझौता होता। वह यहां अपनी पत्नी एवं बच्चों के साथ रहते हैं।उन्होंने कहा कि बिल्कुल। बिल्कुल। इसी बात की हम तैयारी कर रहे थे, हम उस शाम या अगली सुबह शांति परिषद के अध्यक्ष के साथ दोहा जाने एवं समझौते को अंतिम रूप देने की की उम्मीद कर रहे थे।अफगानिस्तान में सरकार बनाने की तैयारी में जुटा तालिबान, पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकातहम 40 साल से युद्ध में उलझे, दुनिया सहायता करेउन्हेांने कहा कि मुझे विश्वास है कि तालिबान नेता उसी, उसी उद्देश्य के लिए दोहा में हमारा इंतजार कर रहे थे। आज करजई नियमित रूपसे तालिबान नेतृत्व से मिलते हैं और कहते हैं कि दुनिया उसके साथ सहयोग करे। उन्होंने कहा कि यह बात भी उतना ही अहम है कि अफगानों को साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि 40 साल से अधिक समय से अफगानिनस्तान पर युद्ध छाया रहा और पिछले 20 साल में अफगानों ने हर तरफ से नुकसान उठाया।हामिद करजईNavbharat Times News App: देश-दुनिया की खबरें, आपके शहर का हाल, एजुकेशन और बिज़नेस अपडेट्स, फिल्म और खेल की दुनिया की हलचल, वायरल न्यूज़ और धर्म-कर्म… पाएँ हिंदी की ताज़ा खबरें डाउनलोड करें NBT ऐपलेटेस्ट न्यूज़ से अपडेट रहने के लिए NBT फेसबुकपेज लाइक करें Web Title : hamid karzai invited taliban to stop chaos in kabul, claims former afghan president interviewHindi News from Navbharat Times, TIL Network
