2024 से पहले ‘एकला चलो रे’ की राह पर केजरीवाल:पंजाब के शपथ ग्रहण समारोह में BJP विरोधी किसी नेता को नहीं बुलाया, तीसरे फ्रंट से भी किनारा

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चंडीगढ़8 घंटे पहले

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देश की नेशनल पॉलिटिक्स में पैर जमाने की कोशिश में जुटी आम आदमी पार्टी (AAP) BJP विरोधी दलों को बैसाखी नहीं बनाएगी। AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की रणनीति BJP और कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए छोटे दलों का कोई तीसरा फ्रंट बनाने के पक्ष में नहीं हैं। मंगलवार को पंजाब की धरती से केजरीवाल ने एक तरह से साफ कर दिया कि वह वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘एकला चलो रे’ की रणनीति पर चलते हुए ही BJP का मुकाबला करना पसंद करेंगे।

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बाद पंजाब में अपने बूते पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई है। मंगलवार को भगवंत मान ने पंजाब के CM पद की शपथ ली। ऐसी चर्चा थी कि अरविंद केजरीवाल इस प्रोग्राम में BJP विरोधी दलों के नेताओं को बुलाकर अपनी ताकत दिखा सकते हैं। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के आने की चर्चा भी थी मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। दरअसल AAP ने इस प्रोग्राम के लिए किसी भी अन्य दल या नेता को न्योता नहीं दिया।

गांधी की जगह शहीद भगत सिंह के नाम पर सियासत

देश में आज तक कांग्रेस और दूसरे सभी दल महात्मा गांधी के नाम पर राजनीति करते आए हैं। कहना गलत नहीं होगा कि गांधी भारतीय सियासत के केंद्र में रहे हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने इसे बदलते हुए अपनी पूरी सियासत शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर केंद्रित कर दी। पंजाब के लोगों का भगत सिंह से भावनात्मक लगाव है और केजरीवाल का यह दांव सफल रहा। देश को आजाद कराने की लड़ाई में महात्मा गांधी और भगत सिंह की विचारधारा एक-दूसरे के बिल्कुल उलट रही। पंजाब के युवा वर्ग में भगत सिंह लोकप्रिय हैं, जिसे AAP ने भुनाया।

पारंपरिक दलों पर लोगों के गुस्से को बनाया ‘हथियार’

भारतीय राजनीति में केजरीवाल अलग तरह की राजनीति कर रहे हैं। वह रिवायती पार्टियों के खिलाफ आम आदमी के गुस्से को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बार भी पंजाब में AAP के पक्ष में समर्थन से ज्यादा लोगों में अकाली दल और कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा था। केजरीवाल ने ‘बदलाव’ की ऐसी लहर चलाई कि पंजाबियों ने AAP को ‘इक मौका’ दे दिया। आने वाले दिनों में केजरीवाल अपने इसी ‘हथियार’ का इस्तेमाल गुजरात और हिमाचल प्रदेश में करते नजर आएंगे।

शपथ ग्रहण के बाद गवर्नर बीएल पुरोहित के साथ अरविंद केजरीवाल और CM भगवंत मान

शपथ ग्रहण के बाद गवर्नर बीएल पुरोहित के साथ अरविंद केजरीवाल और CM भगवंत मान

पंजाब में किसानों की चुनौती से अकेले निपटे

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले 22 किसान संगठनों ने चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान करते हुए आम आदमी पार्टी से गठजोड़ की इच्छा जताई थी। केंद्र सरकार को झुकाकर लौटे किसान नेताओं के हौसले बुलंद थे मगर केजरीवाल ने उनकी चुनाव पूर्व समझौता करने की मांग नहीं मानी। हालांकि तब कहा गया कि केजरीवाल को इसका नुकसान होगा क्योंकि किसान नेता AAP के वोट ही खराब करेंगे। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ और चुनाव लड़ने वाले इक्का-दुक्का नेताओं को छोड़कर बाकी सबकी जमानत तक जब्त हो गई।

दरअसल केजरीवाल ने किसान नेताओं की मांग के बाद सार्वजनिक तौर पर कह दिया कि किसान संगठन ज्यादा सीट मांग रहे है और AAP पहले ही कई सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। इससे पंजाब के लोगों में सीधा मैसेज गया कि किसान नेता आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं। इसी वजह से लोगों ने किसान संगठनों के उम्मीदवारों को वोट नहीं दिए।

AAP नेता कह चुके – राष्ट्रीय विकल्प बनेगी पार्टी

आम आदमी पार्टी (AAP) नेताओं की कांग्रेस और BJP के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को विकल्प बनने की महत्वाकांक्षा किसी से छिपी नहीं है। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 92 सीटें जीतने के बाद AAP नेता राघव चड्‌ढा ने इसे खुलकर जाहिर किया। चड्‌ढा के अनुसार, अब AAP देश में कांग्रेस का विकल्प बनेगी। केजरीवाल 2014 में बनारस लोकसभा सीट पर नरेंद्र मोदी के सामने चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि तब उनकी बुरी तरह हार हुई थी।

भगवंत ने की केजरीवाल की ब्रांडिंग

पंजाब के नए CM बने भगवंत मान ने शपथ लेने के बाद अपनी पहली ही स्पीच में अरविंद केजरीवाल की ब्रांडिंग का मौका नहीं छोड़ा। शपथ दिलाकर गवर्नर के मंच से उतरने के बाद माइक संभालने वाले भगवंत मान ने कहा कि अरविंदर केजरीवाल ने 20 दिन भूखे रहकर पार्टी बनाई। वह आंदोलन से निकलकर राजनीति में आए। मान ने प्रोग्राम में मौजूद लोगों से खास तौर पर केजरीवाल के लिए तालियां बजवाईं ताकि देश के उन सभी लोगों तक संदेश पहुंचाया जा सके जो उनका कार्यक्रम देख रहे थे।

चंडीगढ़8 घंटे पहलेकॉपी लिंकदेश की नेशनल पॉलिटिक्स में पैर जमाने की कोशिश में जुटी आम आदमी पार्टी (AAP) BJP विरोधी दलों को बैसाखी नहीं बनाएगी। AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की रणनीति BJP और कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए छोटे दलों का कोई तीसरा फ्रंट बनाने के पक्ष में नहीं हैं। मंगलवार को पंजाब की धरती से केजरीवाल ने एक तरह से साफ कर दिया कि वह वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘एकला चलो रे’ की रणनीति पर चलते हुए ही BJP का मुकाबला करना पसंद करेंगे।आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बाद पंजाब में अपने बूते पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई है। मंगलवार को भगवंत मान ने पंजाब के CM पद की शपथ ली। ऐसी चर्चा थी कि अरविंद केजरीवाल इस प्रोग्राम में BJP विरोधी दलों के नेताओं को बुलाकर अपनी ताकत दिखा सकते हैं। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के आने की चर्चा भी थी मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। दरअसल AAP ने इस प्रोग्राम के लिए किसी भी अन्य दल या नेता को न्योता नहीं दिया।गांधी की जगह शहीद भगत सिंह के नाम पर सियासतदेश में आज तक कांग्रेस और दूसरे सभी दल महात्मा गांधी के नाम पर राजनीति करते आए हैं। कहना गलत नहीं होगा कि गांधी भारतीय सियासत के केंद्र में रहे हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने इसे बदलते हुए अपनी पूरी सियासत शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर केंद्रित कर दी। पंजाब के लोगों का भगत सिंह से भावनात्मक लगाव है और केजरीवाल का यह दांव सफल रहा। देश को आजाद कराने की लड़ाई में महात्मा गांधी और भगत सिंह की विचारधारा एक-दूसरे के बिल्कुल उलट रही। पंजाब के युवा वर्ग में भगत सिंह लोकप्रिय हैं, जिसे AAP ने भुनाया।पारंपरिक दलों पर लोगों के गुस्से को बनाया ‘हथियार’भारतीय राजनीति में केजरीवाल अलग तरह की राजनीति कर रहे हैं। वह रिवायती पार्टियों के खिलाफ आम आदमी के गुस्से को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बार भी पंजाब में AAP के पक्ष में समर्थन से ज्यादा लोगों में अकाली दल और कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा था। केजरीवाल ने ‘बदलाव’ की ऐसी लहर चलाई कि पंजाबियों ने AAP को ‘इक मौका’ दे दिया। आने वाले दिनों में केजरीवाल अपने इसी ‘हथियार’ का इस्तेमाल गुजरात और हिमाचल प्रदेश में करते नजर आएंगे।शपथ ग्रहण के बाद गवर्नर बीएल पुरोहित के साथ अरविंद केजरीवाल और CM भगवंत मानपंजाब में किसानों की चुनौती से अकेले निपटेपंजाब विधानसभा चुनाव से पहले 22 किसान संगठनों ने चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान करते हुए आम आदमी पार्टी से गठजोड़ की इच्छा जताई थी। केंद्र सरकार को झुकाकर लौटे किसान नेताओं के हौसले बुलंद थे मगर केजरीवाल ने उनकी चुनाव पूर्व समझौता करने की मांग नहीं मानी। हालांकि तब कहा गया कि केजरीवाल को इसका नुकसान होगा क्योंकि किसान नेता AAP के वोट ही खराब करेंगे। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ और चुनाव लड़ने वाले इक्का-दुक्का नेताओं को छोड़कर बाकी सबकी जमानत तक जब्त हो गई।दरअसल केजरीवाल ने किसान नेताओं की मांग के बाद सार्वजनिक तौर पर कह दिया कि किसान संगठन ज्यादा सीट मांग रहे है और AAP पहले ही कई सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। इससे पंजाब के लोगों में सीधा मैसेज गया कि किसान नेता आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं। इसी वजह से लोगों ने किसान संगठनों के उम्मीदवारों को वोट नहीं दिए।AAP नेता कह चुके – राष्ट्रीय विकल्प बनेगी पार्टीआम आदमी पार्टी (AAP) नेताओं की कांग्रेस और BJP के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को विकल्प बनने की महत्वाकांक्षा किसी से छिपी नहीं है। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 92 सीटें जीतने के बाद AAP नेता राघव चड्‌ढा ने इसे खुलकर जाहिर किया। चड्‌ढा के अनुसार, अब AAP देश में कांग्रेस का विकल्प बनेगी। केजरीवाल 2014 में बनारस लोकसभा सीट पर नरेंद्र मोदी के सामने चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि तब उनकी बुरी तरह हार हुई थी।भगवंत ने की केजरीवाल की ब्रांडिंगपंजाब के नए CM बने भगवंत मान ने शपथ लेने के बाद अपनी पहली ही स्पीच में अरविंद केजरीवाल की ब्रांडिंग का मौका नहीं छोड़ा। शपथ दिलाकर गवर्नर के मंच से उतरने के बाद माइक संभालने वाले भगवंत मान ने कहा कि अरविंदर केजरीवाल ने 20 दिन भूखे रहकर पार्टी बनाई। वह आंदोलन से निकलकर राजनीति में आए। मान ने प्रोग्राम में मौजूद लोगों से खास तौर पर केजरीवाल के लिए तालियां बजवाईं ताकि देश के उन सभी लोगों तक संदेश पहुंचाया जा सके जो उनका कार्यक्रम देख रहे थे।

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